गंगोत्री

गंगोत्री

शानदार गढ़वाल पहाड़ियों में बसे गंगोत्री जो समुद्र तल से 3048 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और भारत और तिब्बती सीमा के निकट है गंगोत्री में सफेद ग्रेनाइट की 20 फीट ऊंची संरचना पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है

दोस्तों अगर आपका मन कही सबसे सकून और शांति वाले स्थान पर जाने का कर रहा है तो आप सच्चे मन से आस्था के साथ गंगोत्री में जाकर माँ गंगा के पवित्र चरणों में जाकर लोट लगाये, अपनी झोली को खुशियों से भरे, हमेशा जीवन में उन्नति के पद पर अग्रसर रहे | गंगोत्री एक छोटा सा लोगो को आकर्षित करने वाला कस्वा जैसा है जो चारो धामों की यात्रा में सबसे मुख्य पड़ाव है | यहाँ पर इस कस्वे में माता गंगा की शीतल नदी ह्रदय को खुश करती हुई कभी तेज कभी धीमी बहाव के साथ बहती रहती है | भक्त बड़ी आस्था के साथ यहाँ पर आकर माता गंगोत्री का नाम लेकर डुबकी लगाते है |

इस विशाल नदी का उद्गम ग्लेशियर के स्थान से होता है | यहाँ के बारे में ऐसा कहा जाता है की जब भागीरथ ने अपनी महानता के साथ देवी गंगा को भूमि पर लाने कार्य सम्पूर्ण किया फिर बाद में देवो के देव महादेव शिव जी ने माँ गंगा को अपनी जटाओ मे हमेशा के लिए सजा लिया जो हमेशा से सभी भक्तो ने देखा भी होगा की भोले नाथ जी के जुड़े में सजी रहती है | शिव जी की जटाओ में स्थान ग्रहण करके दु:खी जीवो के कष्टों को दूर किया है |

माँ गंगोत्री यहाँ पर उत्तराखंड राज्य में विराजित है दोस्तों आप जब भी गंगोत्री जाये तो ज्यादा से ज्यादा समय लेकर जाये | क्योकि वहा पर आप जब जायेगे तो घूमते घूमते आपको समय का पता ही नहीं चलेगा की एक ही स्थान पर लोग घंटो बिता देते है | वहां के स्थान बहुत आकर्षक है जो पर्यटकों को स्थल से हटने ही नहीं देते है | दर्शनीय स्थल के साथ यहाँ पर घूमने के स्थानों की भरमार है |

सबसे प्रसिद्ध स्थल गोमुख (शाब्दिक अर्थ, गाय का मुंह) ग्लेशियर, समुद्र तल से 4200 मीटर की ऊंचाई पर गंगा की भौगोलिक उत्पत्ति है। नंदावन ग्लेशियर के साथ 6 किमी का कठिन ट्रेकिंग मार्ग है और शिवलिंग के दर्शन कराता है। भागीरथी और जाट गंगा नदियों के संगम पर भैरों घाटी, भैरवनाथ को समर्पित अपने मंदिर के लिए प्रसिद्ध है

भाषाएँ:हिंदी, गढ़वाली

गंगोत्री घूमने का सबसे अच्छा समय

अप्रैल से जून, नवंबर से नवंबर तक

गंगोत्री के पर्यटन, दर्शनीय स्थल

  1. गंगोत्री मंदिर- गंगोत्री
  2. तपोवन
  3. भैरों घाटी
  4. जलमग्न शिवलिंग

कैसे पहुंचे गंगोत्री


सड़क मार्ग द्वारा

गंगोत्री उत्तराखंड राज्य के प्रमुख स्थलों के साथ मोटर योग्य सड़कों द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। गंगोत्री NH108 के अंत में स्थित है। आईएसबीटी कश्मीरी गेट से ऋषिकेश के लिए बसें उपलब्ध हैं। गंगोत्री के लिए बसें और टैक्सी उत्तराखंड राज्य के प्रमुख स्थलों जैसे ऋषिकेश, देहरादून, टिहरी गढ़वाल, उत्तरकाशी आदि से आसानी से उपलब्ध हैं।

रेल मार्ग द्वारा

गंगोत्री के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है। ऋषिकेश रेलवे स्टेशन NH58 पर गंगोत्री से 234 किलोमीटर पहले स्थित है। ऋषिकेश भारत के प्रमुख स्थलों के साथ रेलवे नेटवर्क द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। ऋषिकेश जाने वाली ट्रेनें अक्सर होती हैं। गंगोत्री ऋषिकेश के साथ मोटर योग्य सड़कों द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। ऋषिकेश, टिहरी गढ़वाल, उत्तरकाशी और कई अन्य स्थानों से गंगोत्री के लिए टैक्सी और बसें उपलब्ध हैं।

हवाई मार्ग द्वारा

250 किलोमीटर की दूरी पर स्थित जॉली ग्रांट हवाई अड्डा गंगोत्री का निकटतम हवाई अड्डा है। जॉली ग्रांट हवाई अड्डा दैनिक उड़ानों के साथ दिल्ली से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। गंगोत्री जॉली ग्रांट हवाई अड्डे के साथ मोटर योग्य सड़कों द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। टैक्सी जॉली ग्रांट एयरपोर्ट से गंगोत्री तक उपलब्ध हैं