बद्रीनाथ

बद्रीनाथ

भारत एक आध्यात्मिकता का देश है जो कई यात्रियों के लिए एक आकर्षण रहा है, विशेष रूप से अपने धार्मिक पर्यटन के लिए। भारत में चार धाम यात्रा अपनी आध्यात्मिक आभा को महसूस करने और असीम आशीर्वाद प्राप्त करने का एक शानदार तरीका है जिसमे चार तीर्थस्थल बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री उत्तरी भारत में धार्मिक यात्रा के सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बन गए हैं

अलकनंदा नदी के दाहिने किनारे पर स्थित, बद्रीनाथ नर और नारायण नाम की दो पर्वत श्रृंखलाओं के भीतर स्थित है, जिसकी पृष्ठभूमि पर नीलकंठ शिखर है। यह लुभावना दृश्य इसे अपीलीय देता है - "गढ़वाल क्वीन"। यह चमोली के उत्तरी जिले में समुद्र तल से 3133 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।

साथियो जैसा कि हम जानते है भारत के उत्तराखंड जिले में स्थित पर्यटक स्थानों ने भारत को सजा दिया है | जिसमे स्थित बद्रीनाथ उत्तराखंड के चमोली जिले में बना हुआ है | यहाँ पर जब आप आयेगे तो आपको भगवान् विष्णु के बद्री रूप के दर्शनं करने का सोभाग्य प्राप्त होता है | देश-विदेश से यहाँ पर श्रधालुओ का ताता लगा रहता है | क्योकि यहाँ पर भगवान विष्णु अपनी माता, पिता और पत्नी, तीनो के साथ विराजमान है| यहाँ पर लक्ष्मी जी, नारद जी उद्धव जी, कुबेर जी शोभायाय मान है| इस नगरी को लोग बद्रीश पंचायत की नगरी भी कहते है | यहाँ के लोगो ने बैर का फल देखकर इस नगरी को बद्री की नगरी का नाम दिया है | बद्री के पेड़ो की आधिक से अधिक संख्या होने पर इसे बद्रीवन, बद्री का आश्रम भी कहा जाता है | यहाँ पर यह चार धाम वाला स्थान है जहाँ पर विष्णु जी के सामने एक अखंड ज्योति हर समय जलती रहती है जहाँ पर लोग हमेशा मनोकामना पूर्ति का पाठ करते रहते है | यहाँ पर विष्णु भगवान शाली ग्राम के रूप में विराजमान है | थोड़े करीब में ही उद्धवजी के पास ही चरणपादुका है। बायीं ओर नर-नारायण की मूर्ति है। इनके समीप ही श्रीदेवी और भूदेवी है। यह 2,000 वर्ष से भी अधिक समय से एक प्रसिद्ध तीर्थ यात्रा का स्थान रहा है |

बद्रीनाथ को तपोभूमि (ध्यान और तपस्या की भूमि) और भुबिकुंठ (पृथ्वी पर स्वर्ग ) के रूप में भी जाना जाता है। मंदिर में प्रवेश करने से पहले, तीर्थ यात्री कुंड, नारद कुंड और सूर्य कुंड में पवित्र स्नान करते हैं।

तीर्थयात्री आम तौर पर अलकनंदा नदी के तट पर ब्रह्म कपल में अपने करीबियों की दिवंगत आत्माओं के लिए संस्कार करते हैं। माता मूर्ति मंदिर है, जो बद्रीनाथजी की माँ को समर्पित है, पंच बद्री - योगध्यान बद्री, भाव्य बद्री और आदि बद्री - तीन अन्य सबसे प्रसिद्ध मंदिर हैं


कैसे पहुंचे बद्रीनाथ


सड़क मार्ग द्वारा

बद्रीनाथ उत्तराखंड के सभी प्रमुख शहरों और आसपास के राज्यों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग 58 बद्रीनाथ को शेष भारत से जोड़ने वाला मुख्य राजमार्ग है। यहां पहुंचने के लिए ऋषिकेश, देहरादून और आसपास के अन्य स्थानों पर बस को बदलना होगा। राज्य परिवहन निगम जीएमवीएन और निजी ट्रैवल कंपनियों शामिल है। हरिद्वार से बद्रीनाथ की दूरी 318 किमी है और ऋषिकेश से यह यात्रा पूरी करने के लिए क्रमशः 12 घंटे और 10 घंटे लगते हुए 298 किमी है।

रेल मार्ग द्वारा

बद्रीनाथ में रेलवे स्टेशन नहीं है। यह हरिद्वार के रेलवे स्टेशनों के माध्यम से 324 किमी, कोटद्वार से 327 किमी और ऋषिकेश से 397 किमी पर शहर से जुड़ा हुआ है। कोटद्वार में बहुत कम ट्रेनें हैं और ऋषिकेश के पास कोई एक्सप्रेस ट्रेन नहीं है। हालांकि, बद्रीनाथ के लिए हरिद्वार सबसे अच्छा जुड़ा रेलवे स्टेशन है, जो शहर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है।

हवाई मार्ग द्वारा

देहरादून में जॉली ग्रांट हवाई अड्डा बद्रीनाथ से निकटतम हवाई अड्डा है, जो लगभग 317 किमी की दूरी पर स्थित है