मिर्जापुर

मिर्जापुर

भारत की शिल्पकारी का जश्न मनाएं / मिर्जापुर उत्तर प्रदेश के उन जिलो मे से एक है| यह ऐतिहासिक महत्व और पुरापाषाण युग के अलावा अपनी प्राकृतिक सुन्दरता के लिए प्रसिद्ध है| इस लेख के माध्यम से जानिए पर्यटन के लिहाज से प्राचीन शहर आपको किस प्रकार आनन्दित कर सकता है| जिले में रहते हुए आप टांडा फॉल्स, सिरसी डैम और मेजा डैम देख सकते है| कुछ लोकप्रिय घाटों में पक्का घाट और नर घाट शामिल है| मिर्जापुर अपने कालीन और पीतल के बर्तनो के उधोगो के लिए भी जाना जाता है| इस जगह मे ओझाला मेला, विन्ध्वासिनी जयंती समरोह, झूलनोत्सव, लोहंडी मेला और कांतिट मेला सहित कई मेले और उत्सव आयोजित होते है| जबकि चुनार का किला और काल भैरव मंदिर भगवान शिव को समर्पित है| मिर्जापुर शहर विंध्यांचल मंदिर के आवास के लिए प्रसिद्ध है| यह विंध्यांचल, अष्टभुजा और काली खोह के पवित्र मंदिर और देवरहवा बाबा आश्रम के लिए प्रसिद्ध है| मिर्जापुर पर्यटको के लिए घंटा घर (क्लॉक टॉवर) विशेष रूप से आसपास के लोगो के लिए मुख्यतः घाटो, मंदिरो के कारण एक गंतव्य है| शहर के कुछ मील की दूरी पर विंध्यांचल के रूप मे जाना जाने वाले हिन्दुओ के लिए एक प्रसिद्ध तीर्थ है|

ओझाला पुल का निर्माण विक्रम संवत महंत परशुराम गिरी ने करवाया था| अष्टभुज मंदिर देवी पार्वती के ही एक रूप अष्टभुज देवी को समर्पित है| उत्तर भारत की तीर्थ यात्रा के दौरान आप यहाँ आ सकते है| व्यंधाम जलप्रपात पर्यटन स्थलो जहाँ वीकेंड पर पर्यटक मौज - मस्ती करने और पिकनिक मनाने के लिए आते है चट्टानी रास्तो से बहती नदी छोटे जलप्रपात का रूप देती है| आप बहती नदी में स्नान के साथ - साथ प्राकृतिक नजारो का आनन्द भी उठा सकते है| यह विंध्यवासिनी मंदिर के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त माँ दुर्गा को समरित और खासकर नवरात्रि के दौरान भक्तो का भारी जमावड़ा लगता है| यह सती के प्रसिद्ध शक्तिपीठो में से एक है| इस शहर की स्थापना राजा नागर ने की थी| जिन्होने इसका नाम देवी पार्वती के नाम पर गिरिजापुर रखा था|

लोककथाओ के अनुसार देवी पार्वती (गिरिजा) ने इस स्थान पर एक यज्ञ मे अपने आप को बलिदान किया था| यह राजदरी, देवदारी, लखनादरी, विंडोम फॉल रेंज, सिरसी आदि जैसी निचली पहाडियो से घिरा हुआ है| जो विंध्य रेंज के विस्तार है| समारोह में जीवनपुत्रिका, दशहरा, दीप महोत्सव, ललही चट्ठा शारदीय और वासंतिक नवरात्र और मेले जैसे ओझाला का मेला, लोहंडी का मेला, विंध्य महोत्सव, होरा गडेरी का मेला, लिट्टी बत्ती का मेला, लगता है|

नवरात्र मेला माँ विंध्यवासिनी देवी को समर्पित है| यह चुनार किला, विंध्याचल मंदिर, लखानिया डारी, काली खोह (देवी काली की गुफा) शक्तिगढ़ किला, आदि जैसे स्थानों को प्रदान करता है| यहाँ विंध्यवासिनी देवी मंदिर एक प्रमुख आकर्षण है और देवी के आशीर्वादो का आह्वान करने के लिए चैत्र और अश्विन महीने के नवरात्रियों के दौरान हजारों भक्तों द्वारा भरे हुए है। शहर मे अन्य पवित्र स्थान है : अशतभुजा मंदिर, काली खोह, सीता कुंड, बुदे नाथ मंदिर, गरुआ तालाब, नारद घाट, मोतिया तालाब, लाल भैरव और काल भैरव मंदिर, एकदांत गणेश, साक्षी गोपाल मंदिर, सप्त सरोवर, गोरक्ष-कुंड, तारकेश्वर नाथ मंदिर, मत्स्येंद्र कुंड, कणकली देवी मंदिर, शिवशिव समोह अवधुत आश्रम और भैरव कुंड। अक्टूबर से फरवरी तक मिर्जापुर घूमने का सबसे अच्छा समय है।

मिर्जापुर क्यों जाए

लोकप्रिय घाटो , लोकप्रिय घाटो

मिर्जापुर घूमने का सबसे अच्छा समय

मिर्ज़ापुर घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से अप्रैल है जब तापमान हल्का और सुखद होता है।