यह प्राचीन मकबरा मध्य आगरा से लगभग 15 किमी दूर स्थित है| यह एक शानदार इमारत है जिसे सफ़ेद पत्थर के अधिकतम उपयोग के साथ बनाया गया है| इस भवन को सम्प्रदाय के संस्थापक राधा स्वामी की समाधि (कब्र) के रूप मे बनाया गया था| संस्थापक को प्यार से ‘स्वामीजी महाराज, कहा जाता था| समाधि जटिल पैटर्न और अन्दर पर बहुरंगी डिजाइनो से सजी है| इसे सोयमबाग के नाम से भी जाना जाता था| यह राधा सोमी विश्वास के लोगो के लिए सबसे प्रतिष्ठित पूजा स्थलो मे से एक है| इमारत की विशेषता केन्द्र मे एक बड़ा गुम्बद है और इसके चारो ओर खम्भे है| सोमी बाग़ को राधा स्वामी समाधि भी कहा जाता है| उन्होने राधास्वामी विश्वास की स्थापना की| राधा सोमी सत्संग आन्दोलन 1861 में हिन्दू धर्म, ईसाई धर्म, सिख धर्म और बौद्ध धर्म जैसे सभी विश्व धर्मो को समाहित करने के प्रयास के रूप मे शुरू किया गया था और इसीलिए यह इमारत मंदिरो, मस्जिदो, गुरुद्वारो और विहारो मे देखी गई शैलियो को दर्शाती है| यह इमारत 110 फीट ऊँची है, जो सफ़ेद पत्थर से बनी है और भीतरी दीवारों पर कई स्तंभो और बारीक पिटरेडुरा जड़ना का काम करती है।भजन घर मे प्रति दिन एक बार सत्संग होता है। यहां भंडारा उत्सव मनाया जाता है जो बड़ी संख्या मे भक्तो को आकर्षित करता है।