आगरा किले के परिसर मे मोती मस्जिद को शाहजहाँ ने बनवाया था इमारत के शीर्ष पर सफ़ेद संगमरमर मे बने परिपत्र गुम्बद और लाल बलुआ पत्थर की दीवारो पर खड़े है| मोती मस्जिद में एक विशाल सफ़ेद संगमरमर की परिष्करण एक स्थापत्य शैली है, जिसने शाहजहाँ के शासन के दौरान लोकप्रियता हासिल की| मस्जिद के निर्माण मे हिन्दू स्थापत्य शैली का भी उपयोग किया गया है| और हिन्दू शैली के गुम्बदो को मस्जिद की सुरक्षा दीवारो को चमकाते हुए देखा जा सकता है| आगरा मे पवित्र स्थानो मे से मोती मस्जिद एक विशेष स्थान रखती है| गर्व से मोती सफ़ेद के रूप में जाना जाता है, यह शाहजहाँ द्वारा अदालत के सदस्यो के लिए पूजा के लिए बनाया इसकी कलाकृति और सुन्दरता भारत के समर्ध शिल्प कौशल पर मुहर लगाती है| 1648 और 1654 के बीच निर्मित यह उत्तर, पूर्व और दक्षिण की ओर से 12 मेहराबो से बना है| मुख्य प्रवेश द्वार पूर्वी तरफ स्थित है, और प्राथर्ना कक्ष को जटिल डिजाइनो के साथ अलंकृत किया गया है, यह अपने तरीके से अदितीय है, हिन्दू शैली के कियोस्क के साथ जो पैरापेट को सजाते है| यह 7 खंडो से मिलकर अपने सफ़ेद संगमरमर लक्जरी का दावा करता है| मोती मस्जिद पूर्व से पश्चिम की ओर ढलान वाले मैदान पर स्थित है| अभ्यारण्य 3 बल्बनुमा आकार के गुम्बदो द्वारा आश्रय है|