एक तरफ राजसी यमुना और दूसरी तरफ अंगूरी बाग़ जिसे महल भी कहा जाता है| जिसे अरमगाह - ए - मुक्कदर के नाम से जाना जाता है, शाहजहाँ ने अपनी बेटी रोशनारा और जहाँआरा के लिए बनवाया था| इस खस महल का निर्माण 1631 मे शुरू हुआ था और 1640 मे पूरा हुआ था| इसके चारो ओर की दीवारो मे भारी छते और चबूतरे है| छत पर दिखाई दे रहे लोहे के छल्ले जहाँ एक बार झाड़ थे| इसके बाड़े (शाहजहाँ द्वारा निर्मित) के बाद मे मुग़ल स्थापत्य कला आती है| यह एक हवादार इमारत है, जो विशेष रूप से अंगूरी बाग़ की ओर मुख किए हुए है| जीली (जटिल सजावटी पत्थर स्क्रीन) के साथ बंद विंडोज रिवरफ्रंट का शानदार द्रश्य पेश करता है| बंगाली परम्पराओ में निर्मित दो तांबे की छत वाले मंडप हरम की प्रमुख महिलाओ के लिए थे| इस उधान के तीन महिलाओ के आवासीय क्वार्टर है| शीश महल या शाही हमाम (स्नान) असंख्य कांच के टुकड़ो और एक केन्द्रीय फव्वारे से सजाते है| खस महल मे टहले और इसके खूबसूरत टैंक, फव्वारे, संगमरमर के गुम्बद, खुले आंगन और एक बड़े केन्द्रीय हॉल का आनंद ले| महल के अंदरूनी हिस्से सोने के काम, भित्ति चित्रो, सजावटी डिजाइन और फूलो के डिजाइन से सजाए गए है| इसके मंडपो का निर्माण लाल बलुआ पत्थर का उपयोग करके किया और सफ़ेद खोल प्लास्टर के साथ लेपित किया गया था|इनमे सुन्दर सुनहरे काम और फ्रेस्को पेंटिंग शामिल थी| इनमे सोने और नीले रंग समय के 2 शाही रंगो का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है| और उनमे कुछ निशान अभी भी दिखाई दे रहे है| खुलने का समय सुबह 6 से शाम 5:30 बजे (दैनिक) है|