इतिमाद-उद-दौला का मकबरा भी ज्वेल बॉक्स या बेबी ताज के नाम से प्रसिद्ध है क्योकि यह ताजमहल के छोटे संस्करण जैसा दिखता है| इतमाद उद दौला की कब्र नूरजहाँ द्वारा बनाई गई थी| यह यमुना नदी के दाहिने किनारे पर और इसके अंदरूनी हिस्सो सहित ताजमहल की एक करीबी प्रतिकृति है| आगरा शहर का यह मुग़ल मकबरा उसके पिता मिर्जा गियास बाग़ के लिए नूरजहाँ (जहांगीर की पत्नी) की आज्ञा पर बनाया गया था, जिसे इतमाद – उद – दौला (राज्य का स्तम्भ) की उपाधि सम्मानित किया गया था| यही से मकबरे का नाम लिया गया| मकबरे की दीवारे सफ़ेद संगमरमर से निर्मित है| और अर्ध कीमती पत्थरो से जड़ी हुई है| मिर्ज़ा गियास-उद-दीन या ग़ियास बेग (जिसे बाद मे इतमाद-उद-दौला के नाम से जाना जाता था)| एक गरीब व्यापारी था और फारस (आधुनिक ईरान) मे रहता था| इतिमाद-उद-दौला का मकबरा नूरजहाँ के अधीन बनाया गया था, जो मुगल सम्राट जहाँगीर की पत्नी थी। वह एकमात्र मुग़ल साम्राज्ञी भी थी| जिनके नाम पर एक सिक्का जारी किया गया था। मकबरे के चारो ओर फारसी शैली के बगीचे अपने आप मे एक आकर्षण है। यह मकबरा राजस्थान के सफ़ेद संगमरमर से बना है और इसकी दीवारो मे अर्ध – कीमती पत्थर लगे है जो बिभिन्न वस्तुओ जैसे, गुलदस्ते, फल आदि को प्रदर्शित करते है| मिर्जा बेग का मकबरा उनकी पत्नी की कब्र के बगल मे जो ताजमहल से प्रेरित था| इस स्मारक मे नूरजहाँ के कई रिश्तेदारो की कब्रे भी रखी हुई है| मकबरे के प्रत्येक कोने पर खड़े चार षट्कोणीय मीनारे 13 मीटर मापती है। दीवारो को पुखराज, गोमेद और कॉर्नेलियन जैसे अर्द्ध-कीमती पत्थरो से जटिल सजावट इनमे शराब की बोतलो से लेकर गुलदस्ते वाली विभिन्न छवियो मे नक्काशी की गई है। छत भी, एक बार हाथ से चित्रित पैटर्न से सजी थी। हालांकि, अब वे खंडहर मे पड़े है।

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