वारंगल

वारंगल

वारंगल का नाम ओरुगल्लू था जब यह 1195 से 1323 सीई तक काकतीय राजवंश की राजधानी थी| इसका पुराना नाम ओरुगल्लू था जहां ओरु का अर्थ है एक और कल्लू का अर्थ है पत्थर। तेलंगाना मे वारंगल जिले का मुख्यालय है| यह वारंगल हैदराबाद के उत्तर पूर्व मे 145 किलोमीटर की दूरी पर है|यह एक सर्वविदित तथ्य है कि काकतीय लोग कला के बहुत शौक़ीन थे इसने काकतीय राजाओ मे कई मंदिरो और किलो का निर्माण किया और कुछ मंदिरो के रूप मे शहर भर मे प्रभावशाली किले और पत्थर के महरावो का निर्माण किया| मुग़ल सम्राट औरंगजेब ने 1687 मे गोलकुंडा सल्तनत के हिस्सें के रूप मे वारंगल का अधिग्रहण किया और हैदराबाद का हिस्सा बन गया| इसे 1948 मे हैदराबाद को भारत सरकार और तेलंगाना क्षेत्र ने अपने कब्जे मे ले लिया था| जहाँ ये आन्ध्र प्रदेश का हिस्सा बन गया था| आज वारंगल अपने शिक्षण संस्थानो के लिए प्रसिद्ध है| यह शहर प्रतिष्ठित काकतीय विश्विद्यालय, महात्मा गाँधी मेडिकल कालेज और राष्ट्रीय प्रौधोगिकी संस्थान है| वारंगल मे सुन्दर झीलो, बेहतरीन मन्दिरो, सम्रध जीवो और वनस्पतियो ने पर्यटक केन्द्र के रूप मे इसके महत्व का योगदान दिया है| काकतीय लोगो के सांस्कृतिक और प्रशासनिक भेद का उल्लेख प्रसिद्ध इतालवी यात्री मार्को पोलो ने किया था|

fairs and festivals

इस वारंगल मे मनाये जाने वाले त्यौहार अक्टूबर के दौरान ईद उल फितर, दशहरा और दीपावली है| इन त्योहारो के आलावा सरकाका यात्रा या मण्डली भी आयोजित की जाती है| जो दिअर्थी मेला है और लगभग पांच मिलियन लोग इसमे भाग लेते है|

वारंगल क्यों जाए

सुन्दर झीलो , बेहतरीन मन्दिरो , सम्रध जीवो , वनस्पतियो |

वारंगल घूमने का सबसे अच्छा समय

वारंगल जाने का सबसे अच्छा समय नवम्बर से फरवरी के महीनो के बीच होता है|

वारंगल के पर्यटन, दर्शनीय स्थल

  1. हजार स्तम्भ मन्दिर
  2. भद्रकाली मन्दिर
  3. वारंगल का किला
  4. रामप्पा मन्दिर
  5. जैन मन्दिर वीरनारायण मन्दिर
  6. पाखल झील
  7. काकतीय रॉक गार्डन
  8. सोमेश्वर मन्दिर |