कोणार्क

कोणार्क

साथियों अपने भारत ने तो पर्यटन स्थानों को खोज खोज कर सजा कर घूमने के लिए रखा है तो आप भी अपने पूरे परिवार को कही दूर लेजाकर कही दिन बिताना चाहते है तो ओडिशा जरूर जाये

हिन्दू धर्म मे सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व होता है | ज्योतिष शास्त्र मे सूर्यदेव को ग्रहो का राजा माना गया है | वेदों – पुराणो के द्वारा सूर्य देव की आराधना से कुंडली के सभी दोष दूर होते है | वहीं सभी देवताओ मे सूर्य ही एक ऐसे देवता है जिनके साक्षात् प्रत्यक्ष रूप से दर्शन होते है | इसके साथ ही सूर्य देवता की रोशनी से ही जीवन सम्भव है यही नही धरती पर सूर्य ऊर्जा का सबसे महत्वपूर्ण स्त्रोत है | वहीं वैदिक काल से ही इसकी पूजा – अर्चना की जा रही है कई बड़े बड़े राजाओ ने भी सूर्य देव की आराधना की और कष्ट दूर होने एवं मनोकामनाओ पूर्ण होने पर अटूट आस्था प्रदर्शित करवाई | वही उनमे से एक है कोणार्क का सूर्य मंदिर।

ओडिशा का इतिहास विश्व प्रसिद्ध है क्योकि इसका इतिहास अशोक सम्राट से जुड़ा हुआ है पहले के समय में ओडिशा को कलिंग के नाम से जाना जाता था यही पर अशोक सम्राट विजय प्राप्त करते हुए आगे बढ़ रहे थे तभी उन्होने जीत हासिल कर ली, लेकिन युद्ध में काफी लोग मारे भी गए तब उन्ही वीर जवानों की पत्नी अपने बच्चो के साथ लड़ने के लिए भी युद्ध में पहुँच गयी यह सब देखकर सम्राट को अच्छा नहीं लगा वो बहुत दुखी हुए तभी उन्होने दुबारा हिंसा न करने का प्रण लिया ओडिशा भारत का 11 व सबसे ज्यादा जनसँख्या वाला देश है

दोस्तों कोणार्क सूर्य मंदिर भारत के ओडिशा राज्य में कोणार्क सूर्य मंदिर है जो लगभग 35 किलोमीटर उत्तरी पूर्व में कोणार्क में बना सूर्य मंदिर है जिसका वहां पर विशेष महत्व है यह मंदिर चंद्रभागा नदी के किनारे बना हुआ है जिसको लगभग 13 वी शताब्दी में बनाया गया है जो भगवान सूर्य देव जी को समर्पित है इस मंदिर के मुख्य द्वार पर जब आप मंदिर के अन्दर जब प्रवेश करीगे तो दोनों तरफ शेर बने हैं जो हाथी को कुचलते हुए हुए दिखाए देते है और सुन्दर लगते है यह भारत की एक विश्व धरोहर में से एक मंदिर है जिसको 1984 में यूनेस्को ने की थी इस मंदिर को देखने के लिए हमेशा पर्यटकों की भीढ़ उमड़ी रहती है कोणार्क मंदिर में सूर्य की पहली किरण सीधे मुख्य प्रवेश द्वार पर पड़ती है। कोणार्क के सूर्य मंदिर की विशेषता यह है कि इस मंदिर के आधार पर 12 जोड़ी पहिए स्थित हैं। इस मंदिर के आधार पर 12 जोड़ी पहिए स्थित हैं। इन पहियों की छाया को देखकर लोग सही सटीक समय का पता लगा लेते है

कोणार्क घूमने का सबसे अच्छा समय

सही तरीके से यात्रा का आनंद लेने के लिए, अक्टूबर से मार्च का समय सबसे अच्छा माना जाता है। इन महीनों के बीच शहर में हल्के वातावरण का आनंद मिलता है।

कोणार्क के पर्यटन, दर्शनीय स्थल

  1. सूर्य मंदिर
  2. कोणार्क संग्रहालय
  3. कोणार्क बीच
  4. रामचंडी मंदिर
  5. बलूचंद-कोणार्क वन्यजीव अभयारण्य
  6. चंद्रभागा बीच
  7. एएसआई संग्रहालय
  8. नवग्रह श्राइन
  9. कोणार्क अर्बन हाट

कैसे पहुंचे कोणार्क


सड़क मार्ग द्वारा

कोणार्क एक विस्तृत नेटवर्क के माध्यम से आसपास के सभी शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है जिसमें राष्ट्रीय के साथ-साथ राज्य राजमार्ग भी शामिल हैं। ये आगे शहर को बाकी देशों से जोड़ते हैं।

रेल मार्ग द्वारा

शहर का अपना जंक्शन, पुरी और भुवनेश्वर के रेलवे स्टेशन निकटतम रेलवे स्टेशन है जो न केवल राज्य के प्रमुख हिस्सों बल्कि देश के साथ भी जुड़ा हुआ है।

हवाई मार्ग द्वारा

बीजू पटनायक अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा निकटतम हवाई अड्डा 1 घंटा 38 मिनट (72.5 किमी) दूर है जो देश के सभी प्रमुख शहरों से नियमित घरेलू उड़ानें संचालित करता है।