देवगढ़

देवगढ़

देवगढ़ शहर झाँसी से 123 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है| देवगढ़ नाम की नाम की पहाड़ी श्रृंखला के पश्चिमी भाग मे है इस जगह को बहुत ऐतिहासिक महत्व मिला है| यह स्थान महान राजवंशो जैसे गुप्तो, गुर्जर – प्रतिहारो, गोंडो भारत के मुस्लिम सम्राटो, मराठो और ब्रिटिश लोगो के इतिहास मे एक महत्वपूर्ण तत्व रहा है| एक विष्णु और कई जैन मंदिरो को समर्पित एक उत्कृष्ट मंदिर के खँडहर का निरिक्षण कर सकते है| गुप्त शासन के दौरान विष्णु मंदिर का निर्माण किया गया है|

2 place of view

दशावतार मंदिर पूरे उत्तर भारत मे यह उत्कृष्ट विष्णु मंदिर पहला पञ्चततन मंदिर है| मूर्तिकला द्वार जो पवित्र कक्ष का प्रवेश बिंदु है, मे गंगा और यमुना के आंकड़े है गजेन्द्रमोक्ष पैनल, नर नारायण तपस्या और अनन्तशायी विष्णु तीन विशाल खंड है, जो वैष्णव पौराणिक कहानियो घटनाओ को दर्शाते है| जैन मंदिर कनाली किले मे ये बेतवा की देखरेख मे है| 6 से 17 वीं शताब्दी के बीच यह स्थान जैन धर्म का एक स्थान था| जिन पौराणिक कथाओ, तीर्थकर चित्रो, व्रत स्तंभो, मन्नतो की झांकी, जैन चित्रो और बहुत कुछ की घटनाओ और झलकियों को इन मंदिरों में और उसके आसपास बड़े वर्गो पर प्रस्तुत किया जाता है| देवगढ़ पुरातत्व संग्रहालय के प्रदर्शन में मूर्तियों का एक उत्कृष्ट वर्गीकरण देखा जा सकता है|

देवगढ़ क्यों जाए

ऐतिहासिक महत्व |


कैसे पहुंचे देवगढ़


सड़क मार्ग द्वारा

इस स्थान पर अक्सर बसो के माध्यम से पहुंचा जा सकता है और टैक्सी और निजी कारो द्वारा भी |

रेल मार्ग द्वारा

जाखलौन का निकटतम रेलवे स्टेशन देवगढ़ से 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है |

हवाई मार्ग द्वारा

निकटतम हवाई टर्मिनल ग्वालियर देवगढ़ से 235 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है |