यमुनोत्री चार धाम यात्रा: परिवार के सभी सदस्यों को लेकर निकले पूरी श्रध्दा के साथ यमुनोत्री की यात्रा के लिए ...

साथियों हम लोग घूमने के स्थानों पर तो जाते ही रहते है लेकिन कभी कभी अपने परिवार और बच्चो को लेकर दर्शनीय स्थल पर भी जाये क्योकि अपना सभी स्थानों में प्रसिद्ध, भारत देश एक ऐसा देश है जहाँ देश- विदेश से लोग तीर्थ यात्रा के लिए यहाँ पर आते है और भागवान के चरणों में अपना शीश नवाते है आज हम आपको भारत के उत्तराखंड में स्थित यमुनोत्री के बारे में बताने जा रहे है चलये जानते है ...

उत्तराखण्ड राज्य के उत्तरकाशी जिले के गढ़वाल क्षेत्र के पचिमी हिमालय में बना एक तीर्थ का स्थान है यमुनोत्री, जिसकी ऊँचाई समुन्द्र तल से लगभग 3,293 मीटर हैं। यह धाम यमुना जी की विशाल चोटियों की ग्लेशियर में ठण्डे शीतल जल की लहरे आपके मन को खुश कर देगी यमुना नदी बहुत ही पवित्र नदी है जिसमे एक बार डुबकी लगाने से ही व्यक्ति की सारी मन की चिंताए दूर हो जाती है सभी नदियों में यमुना नदी दूसरे स्थान पर है जो चारो धामों में अपनी अलग ही आस्था की नदी मानी जाती है यह वो नदी है जिसको सूर्य देवता की पुत्री और यम की बहन कहा जाता है

उत्तराखंड में यमुनोत्री नदी के पास में एक विशाल मंदिर भी है जिसकी लम्बाई को अगर मापा जाये तो 3030 है यह वो मंदिर है जहाँ पर श्रधालुओ की कभी आस्था टूटती ही नहीं है यहाँ पर जो सच्चे दिल से आता है वो कभी यहाँ से निराश होकर नहीं जाता है यहाँ के बारे में ऐसा कहाँ जाता है कि यहाँ की जो यमुना देवी जी है वो ऊपर से लेकर नीचे तक चाँदी में लिपटी हुई है और मालाओ फूलो से उनका रोज श्रंगार किया जाता है इस श्रृंगार को देखने के लिए माँ के सामने लोग भारी संख्या में खड़े होकर दर्शन का इन्तजार करते है और माँ का जय कारा भी लगाते है भोर और संध्या के समय यहाँ पर आरती होती है और बाद में माँ का प्रसाद मिलता है इस मंदिर को लगभग 19 वी शताब्दी में बनाया गया था

माँ के द्वार खुलने और बंद होने का समय

  1. यमुना माँ के द्वार सुबह 6.00 बजे खुलते है
  2. यमुना माँ के कपाट संध्या के समय में 8.00 बजे अंतिम दर्शन होते है

माँ के दर्शन के लिए शुल्क

कुछ लोग घूमने या तीर्थ करने इस लिए नहीं जाते क्योकि हर स्थानों पर प्रवेश शुल्क जाता है लेकिन यहाँ पर ऐसा बिलकुल नहीं है आप बिना किसी शुल्क के यहाँ पर माँ के दर्शन कर सकते है यहाँ पर इसका कोई शुल्क नहीं जाता है

यमुना जी की जानकी चट्टी -

यमुनोत्री में दोस्तों यहाँ की यह चट्टी सबसे अच्छी और विशाल चट्टान है जो माता जानकी और हनुमान चट्टी के नाम से मशहूर है यहाँ पर लोग ट्रेकिंग का मज़ा लेने के लिए भी आते है जो यमुना जी के ट्रैक के लिए अच्छा रास्ता है यमुना नदी के पास यमुनोत्री जी का जो धाम है वह हॉट स्प्रिंग्स का सबसे भव्य यहाँ का आकर्षण है, यह विशाल चट्टी पहाड़ो से घिरी हुई है जिसकी ऊँचाई 2700 मीटर है

यमुना जी में सूर्य कुण्ड

यमुना जी में सबसे ज्यादा घूमने वाली जगह है यमुना जी के पिता सूर्य थे, और यह कुण्ड भी उनके पिता सूर्य देव के नाम पर ही बना है इसलिए इसको सूर्य कुण्ड भी कहते है यहाँ की सबसे चमत्करी बात यह है कि इस कुण्ड का पानी ठण्डा नहीं होता है गर्म होता है यहाँ के इस कुण्ड में लोग सूती कपड़े में बांध कर चावल और आलू फैकते है और थोड़ी देर में बाहर निकालते है तो हमको पका हुआ भोजन मिलता है

यमुना जी में बड़कोट-

उत्तराखंड राज्य में यमुना नदी से लगभग 49 किलोमीटर की दूरी पर है जो बहुत ही विशाल स्थल है यह एक दर्शनीय स्थान है जिसकी आस्था ने भक्तो को अपनी तरफ आकर्षित कर लिया है बरकोट को उत्तराखंड ने अपनी गोदी में बिठा रखा है जो पर्यटकों के दिल को बहुत ही रोमांचक लगता है यहाँ से थोड़ी आगे जब आप चलते है तो आपको बंदरपून नाम की सुन्दर सी चोटी देखने को मिलती है जो बहुत ही अद्भुत है सबसे अच्छी बात यहाँ की यह है की यहाँ पर आकार पर्यटकों को नई नई चीजो की जानकारी मिलती है

यमुना जी में खरसाली-

यमुना जी में जो भी दर्शन करने आता है वो यहाँ इस खरसाली में जरूर आता है यमुना जी के बाद पर्यटक सीधे यही पर जाते है क्योकि खरसाली पिकनिक के लिए बहुत अच्छा स्थान है यहाँ पर मज़ा करने के लिए थर्मल स्प्रिंग्स,पानी के झरने है

यमुना जी में सप्तऋषि कुंड-

दोस्तों हम लोगो कही भी जाते है तो वहां पर प्रकितिक स्थानों को पहले देखते है क्योकि प्रकिर्तिक वातावरण का अपना अलग ही मज़ा है सप्तऋषि कुंड नाम की एक प्रकितिक झील है जो 4421 मीटर ऊँची है इस स्थान को यमुना जी का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है पर्यटक हमेशा ऐसे ही स्थानों की तलाश में रहते है जहाँ पर झील होती है यहाँ पर आपको कई अलग अलग तरह के फूलो का गुल्दाता नुमा नज़ारा भी देखने को मिलता है

यमुना जी में दिव्य शिला -

दिव्य शिला यमुना जी का सबसे अधिक महत्वपूर्ण स्थान है जो यमुनोत्री के दर्शन के लिए आता है वो यहाँ के दर्शन के बिना यात्रा अधूरी मानी जाती है जो यमुना जी का ही प्रतिक है यहाँ पर शिला पर भक्त पूजा पाठ करते है

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