इतिहास की धरोहर झाँसी: झांसी की सैर करने से पहले जान ले झाँसी ट्रेवल गाइड ....

आपके सफ़र को यादगार बनाने के लिए सबसे बेहतरीन जगह झासी जो है अपनी छोटी ट्रिप के प्लान के हिसाब से सबसे अच्छी जगह साबित हो सकती है .. तो बनाइये प्लान झाँसी का ..

दोस्तों काम करते करते कुछ पल, जब बैठे हो तो दिल करता है कि कभी कुछ दिन बाहर जाकर शोर और काम वाली दुनिया से अलग रहने का, और भागदौड़ से ब्रेक करके शांति के दिन बिताने का, तो आप अपना मन बनाकर निकल पड़े झाँसी के सफ़र पर जो भारतीय संग्राम का सबसे पक्का हिस्सा है

दोस्तों मैं आज आपको यहाँ के घुमने से पहले ज्ञान के लिए इसके इतिहास के बारे में बताती हूँ झाँसी वो स्थान है जिसके बिना अपने भारत देश की आजादी अधूरी तो थी बल्कि नामुमकिन भी थी झाँसी मध्य पश्चिमी और दक्षिणी भारत के मध्य में बसा हुआ चंदेल राजाओ का रहने का मुख्य स्थल हुआ करता था अगर आपके मन में झाँसी की यात्रा करने का मन कर रहा हो तो सोचे न बल्कि निकल पड़े क्योकि झाँसी एक प्रसिद्ध एतिहासिकता से भरा हुआ स्थान है और भारतीय झाँसी की रानी की वीरता वाला देश रानी की बहादूरी के लिए पूरे देश विदेश में जाना जाता, यह उत्तर प्रदेश की सीमा पर बसा हुआ शहर है जो बुंदेलखंड इलाके में आता है यहाँ पर बंगरा नाम की पहाड़ी पर शहर झाँसी किलो इमारतो से चारो तरफ से भरा हुआ है

यहाँ की दतिया स्थित पीतांबरा पीठ

झाँसी में दतिया स्थित पीतांबरा पीठ यहाँ के करीबी जिला मुख्यालय से थोड़ी दूर है जिसकी दूरी को अगर मापा जाये तो 28 किलोमीटर होगी यह यहाँ की शक्ति पीठ के रूप में विख्यात है जहाँ पर मप्र के दतिया में राजसत्ता की देवी मां पीताम्बरा व तंत्र साधना की देवी मां धूमावती का मंदिर है। जो सबसे अलग आस्था की पीठ है इस स्थान की ऐसी मान्यता है कि यह लगभग २ सौ से ज्यादा महाविद्यालयों का केंद्र भी है जिसको देखने के लिए यहाँ पर दूर दूर से यहाँ पर लोग आते है वैसे तो यहाँ पर रोज ही देवी पीताम्बरा के दर्शन होते है लेकिन शनिवार के दिन यहाँ पर विशेष रूप से विधि विधान से लोग पूजा पाठ करते है और अपनी मनोकामनाओ के लिए चुन्नी बांधते है

ओरछा जो है बुंदेलखंड का अयोध्या

ओरछा यहाँ पर झाँसी का मप्र में बसा बुंदेलखंड के नेवाड़ी जिले में आने वाला बुंदेलखंड का अयोध्या का शहर कहा जाता है

संसार का एक यह अकेला ऐसा मंदिर है जहां भगवान राम की पूजा एक राजा के रूप में की जाती है सुबह सूर्य निकलने से पहले और सूर्य डूबने के बाद मैन की आरती की जाती है और सलामी दी जाती है कहा जाता है यहाँ पर 400 वर्ष पहले राज्यतिलक होने के बाद भी पुर्शोतम राम जी ने राज्य गद्दी पर बेठने के बाद भी यहाँ पर भगवान राम को राजा के रूप में माना जाता है यही पर राम राज सरकार को "गार्ड ऑफ आर्नर" भी दिया जाता है।पर्यटकों को अपनी तरफ खीचता हुआ यह मंदिर झांसी से लगभग 16 किलोमीटर दूर है ओरछा झांसी से मात्र 16 किलोमीटर की दूरी पर है झांसी देश के प्रमुख रेलवे लाइनों से जुड़ा हुआ है पर्यटक अगर रोज आ जाना चाहे तो झांसी से होकर ही आना पड़ता है

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