Delhi

दिल्ली की दस डरावनी जगह

आइए जानते है दिल्ली की इन दस जगहों के बारे मे जहां आज भी भूतो ,आत्माओं या कोई अदृश्य शक्तियों का निवास है इन जगहो पर बहुत कम ही लोग जाने की हिम्मत जुटा पाते है अभी तक आपने बहुत से ऐसे डरावने भुतहा स्थानो के बारे मे सुना होगा और यह जानकर आश्चर्य होगा कि दिल्ली मे ऐसे काफी हॉन्टेड प्लेस है अगर आप निडर और बहादुर भी है तो इस वीकेंड हो जाए तैयार हॉन्टेड सैर पर, आइडिया बुरा नही है ।

क्यो …. दिल्ली भारत की राजधानी है जिसके पास अपनी कहानी है यहां तरह – तरह के स्वादिष्ट व्यंजन है अच्छी जॉब्‍स भी है कुछ रोंगटे खड़ी कर देने वाली जगहे है जी हां, आप यह सुन कर चौक जाएंगे इस बात पर शक नही है कि दिल्ली भारत का अतिप्राचीन नगर है यमुना नदी के किनारे इस नगर का गौरवशाली इतिहास है दिल्ली शहर पर पहले मुगलो का वास था फिर विदेशी सरकार का दिल्ली के लोग भले ही यहां की खूबसूरती मे खो गये हो लेकिन वह इस बात से इंकार नही करेगे कि यहां कुछ ऐसी जगहे है जो भूतिया दिल दहलाने वाली जगहो का खुलासा करते है तो आइए जानते है इन दिल्ली की डरावनी जगहो के बारे मे ….

फिरोजशाह कोटला किला विक्रम नगर

फिरोजशाह तुगलक द्वारा 1354 में यह बनवाया गया था । जो आज खंडर हो चुका है । स्थानीय लोगों की माने तो हर गुरुवार को यहां मोमबत्ती और अगरबत्ती जलती दिखती है । और  तो और , अगले दिन किले के कुछ हिस्सो में कटोरे में दूध तथा कच्चा अनाज भी रखा पाया मिलता है । ऐसा होता रहता है । जिसके चलते इस किले की पहचान अब भूतो के किले के रूप में होने लगी है । इस किले का निर्माण सन 1534 में फिरोजशाह तुगलक ने करवाया था । यह कुख्यात है कि यहां की हवेलियों और खंडहर पर जिन्नो का कब्जा है । आज भी गुरुवार को यहां आसपास के स्थानीय लोग आकर मोमबत्तियां और अगरबत्ती जलाकर जिन्नो से मन्नत और दुआएं मांगते देखे जा सकते हैं ।इसीलिए इसे भूतों का किला भी कहा जाता है ।

म्यूटिनी हाउस , कश्मीरी गेट

इस स्मारक का निर्माण 1857 में मारे गए सिपाहियों की याद में करवाया गया था । हां यादें और साए अभी भी इस इमारत के आसपास रहते हैं ,  इसलिए इसे डरावना माना जाता है  ।

संजय वन

इस इलाके मे जो 10 किमी के क्षेत्रफल मे फैला हुआ है । यहां पर बच्चो की आत्माएं दिखने के दावे किए गए है । जो अक्सर खेलते रहते है । तथा अंदर से यह वन घना और डरावना भी है । किशनगढ़ और महरौली के नजदीक साउथ दिल्ली के बीचों -बीच  बसे इस लगभग 10 किलोमीटर के जंगल ट्रेल मे भरपूर हरियाली है । यहां बच्चो की आत्माएं होने का दावा किया गया है । लोगो का कहना है । कि यहां उन्होने बच्चो की चीख – पुकार की आवाजे सुनी है ।

करवला कब्रिस्तान

करवला कब्रिस्तान , जैसा नाम वैसा कब्रिस्तान । यहां भी फिल्मी कब्रिस्तान की तरह साये दिखने और उनकी हरकतो के गवाह आसपास के लोग है ।

खूनी दरवाजा
यहां बहादुर शाह जफर के तीन बेटों को अंग्रेजों ने मार डाला था । यह कहा जाता है । तभी से तीनो शहजादे इसी इलाके मे साया बनकर घूमते है । ये नाम ही अपने आप मे डरावना है , इतिहास मे दर्ज खूनी दरवाजा वो जगह है , जहां अंग्रेजो ने इन तीन लड़को को गोली मारी थी । कहते है कि आज भी आस – पास इनकी आत्माएं भटकती रहती है । और लोगो से उनके अपमान का बदला लेने के लिए उतारू रहती है ।

द्वारका (सेक्टर-9), मेट्रो स्टेशन, द्वारका
काॅल सेन्टर के नाइट शिफ्ट मे काम करने वाले लोगो की यह शिकायत है । कि इस इलाके मे लोगो को थप्पड़ पड़ते है । और यह भी बताते है । कि उनके कैब के आगे को एक औरत आ जाती है , जो तेज रफ्तार से आगे-आगे दौड़ने के बाद गायब हो जाती है । इन सबके बारे मे जानने के बाद ही शायद आप इस इलाके मे तेज नहीं चलेंगे ।

अग्रसेन की बावली, कनॉट प्लेस
अग्रसेन की बावली दिल्ली की राजधानी मे कनाॅट प्लेस से थोड़ी ही दूरी पर स्थित है । महाराजा अग्रसेन ने इस बावली का चौदवहीं शताब्दी मे निर्माण करवाया था । इसकी लंबाई 60 मीटर और चौड़ाई 15 मीटर है । इस प्राचीन स्मारक को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) का संरक्षण प्राप्त है । किसी जमाने मे यहां हमेशा पानी भरा रहता था । अब यह सूख चुकी है । इसके बारे मे गाथा है कि यहां का काला पानी लोगो को अपनी तरफ सम्मोहित कर आत्महत्या के लिए उकसाता था । इसके तल तक पहुचंने के लिए 106 सीढियां पार करनी पड़ती है ।

हाउस नम्बर W-3, ग्रेटर कैलाश-1
इस मकान मे बुजुर्ग दम्पत्ति की हत्या कर दी गई थी । और इसके बाद उनके मृत शरीर को वही टंकी से महीने बाद बरामद किया गया था । तथा आस – पास रह रहे लोगो ने वहां से किसी के रोने और चीखने-चिल्लाने की आवाजें कई बार सुनी है । अब इस मकान मे कोई रहता नही है । और अब इसको भुतहा घोषित किया गया है ।

निकोल्सन कब्रगाह, सिविल लाइंस
यह दिल्ली की सबसे पुरानी कब्रगाहों मे से एक है। इसको ब्रिटिश राज मे स्थापित किया गया था। इस कब्रगाह मे ब्रिटिश सैनिको, उनके पत्नियों और बच्चों की कब्रें है। यहां पहुचंने वाला कोई भी इंसान दैवीय धमक को महसूस कर सकता है। साथ ही यहां का सन्नाटा बहुत जानलेवा होता है।

जमाली-कमाली का मकबरा और मस्जिद, महरौली,
यह मस्जिद दिल्ली के महरौली मे स्थित है । यहां 16 वीं शताब्दी के सूफी संत जमाली और कमाली की कब्रे मौजूद है । यहां के बारे मे लोगो का विश्वास है कि यहां पर जिन्नो का कब्जा रहता है । तथा कई लोगो को यहां इस जगह कई डरावने अनुभव मिले है । सूफी संत जमाली लोधी हुकूमत के राज कवि थे । इसके बाद बाबर और उनके बेटे हुमायूं के राज तक सूफी संत जमाली को काफी तवज्जो दी गई है । माना जाता है कि इस जमाली के मकबरे का निर्माण हुमायूं के राज के दौरान पूरा किया गया है ।

इस मकबरे मे दो संगमरमर की कब्रे है । एक जमाली की कब्र और दूसरी कमाली की कब्र । तथा जमाली कमाली मस्जिद का निर्माण 1528 – 29 मे कराया गया था । इस मस्जिद को लाल पत्थर और संगमरमर से बनाया गया है । दिल्ली के महरौली मे यह मस्जिद आर्केलॉजिकल कॉम्पलेक्स मे स्थित है । सोलहवी शताब्दी के सूफी संत जमाली तथा कमाली की कब्रे मौजूद है । इस इलाके में लोगो ने धक्का देने और मुक्के मारने की शिकायत की है , और यह भी बताते है कि यहां पर औरतें के रोने और चीखने-चिल्लाने की आवाजें आया करती है ।

खूनी नदी, रोहिणी
इस ( रोहिणी ) कम शोर गुल वाले इलाके मे यूं भी कम लोग आते है । और नदी के आसपास कोई नही जाता है । इसका कारण नदी किनारे लाश मिलना। यहां नदी किनारे लाशें मिलना अब आम बात है । यहां हत्या , आत्महत्या , दुघर्टना का कारण चाहे जो हो । यही कारण है कि यह जगह डरावनी जगहो मे शुमार रहती है । इसके इलाके से बहती नदी के बारे मे चर्चा है । कि कोई भी इंसान इस नदी के सम्पर्क मे आता है । तो यह नदी उसका खून चूस लेती है । इसलिए कोई भी इंसान वैसे भी इस नदी के आसपास नही जाता है । हालाकिं यह जगह काफी शोरगुल वाली है । कारण नदी किनारे लाश का मिलना । यही कारण है । कि लोग इसका डरावनी जगह मे शुमार करते है ।