नवरात्रि में करें मां के इन चमत्कारी मंदिरों के दर्शन

भक्तो माँ के सभी स्थानों शक्ति पीठो पर माता के जय कारो के साथ सभी स्थानों फिर वो चाहे स्थान कोई भी सभी जगह नवरात्री का मेला सा लगा रहता है मंदिरों के पास दुकानों पर माँ के लिए भक्त श्रृंगार और लाल रंग की चुनरी चढाते है सभी स्थानों पर अलग सी रौनक दिखाई देती है स्त्रिया कलश यात्रा निकालती है यह कलश यात्रा बहुत धूम धाम से ढोल बजा कर निकाली जाती है ...

बंगाल में अलोकिक दुर्गा पूजा

भक्तो दुर्गा पूजा का सबसे ज्यादा महत्व पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा पूजा सबसे प्रसिद्ध त्यौहार है जिसकी एक झलक आप देख लोगे तो आपको हर बार वही जाकर दुर्गा पूजा में शमिल होने का मन करेगा पछिम बंगाल में बड़े बड़े पंडाल लगाकर उनको दुल्हन की तरह सजाया जाता है और माँ का दरबार को लाल चमकीले कपड़ो से दरबार में तस्वीर रखकर सजाया जाता है पंडाल को फूलो से बंदन बार लगाया जाता है रंगों की छटा दरवार में अपनी खुशबु दिखाती है दरबार में बैठने के बाद माँ के सभी स्वरूप तेजी से चमकते है इस त्योहार के दौरान यहां का पूरा माहौल शक्ति की देवी दुर्गा के रंग में रंग जाता है। बंगाल के हिदुओ के लिए दुर्गा पूजा से अच्छा उत्सव कोई नहीं होता है यह त्यौहार वहा का एक मात्र बड़ा त्यौहार होता है पूजा में सिंदूर खेला, धुनुची नृत्य और बहुत से धर्मिक गानों पर नृत्य होता है

केरल के कोलम की नैना देवी मंदिर

भक्तो कोलम की नैना देवी की शक्ति पीठ सभी धर्मिक स्थलों से ज्यादा महत्व रखने वाली सच्ची शक्ति पीठ है यहाँ पर देवी के आगे नारियल फोड़ कर उनकी स्तुति की जाती है मंदिर बहुत ही भव्य है यहाँ पर देवी ने बहुत बार साक्षात् दर्शन भी दिए है नैना देवी मंदिर की 51 शक्ति पीठ है यह मंदिर लगभग सभी स्थानों पर है केरल में यह मंदिर ऊचे स्थानों पर बना है जो उत्तर दिशा में शिवालिक पर्वत पर बना हुआ है यहाँ पर देवी सती के नेत्र गिरे थे माता के दर्शन भक्तो को पिंडी रूप में होते है पहले मंदिर में पास गुर्जर लोग यहाँ पर रहते थे मंदिर से सटी हुई एक गुफा है जिसमे लोग लेट कर जाते है और यहाँ पर साल के दोनों नवरात्रों में भक्तो का मेला सा लगा रहता है माँ को देखने के लिए इस मंदिर का निर्माण नैनानामक गुर्जा माता का परम भक्त था जिसको माँ ने सपने में मंदिर का निर्माण करवाने की आज्ञा दी थी

राजस्थान का कैला देवी मंदिर

भक्तो कैला देवी का मंदिर धर्म का सबसे बड़ा आरध्य माना जाता है धर्म के प्रति आस्था रखने वाले लोग माँ के सभी श्रधालुओ के यहाँ आने की परम्परा प्रचीन समय से चली आ रही है माँ के प्रेम भक्तो को यहाँ आने के पर मजबूर कर देता है यह मंदिर बहुत भव्य स्थान वाली भूमि पर बना हुआ है यह स्थान आज बहुत बड़ा भक्ति का केंद्र बन चुका है जहाँ पर देश विदेश से भक्त माँ के दर्शन के लिए आते है और यहाँ आकर कुछ दिन रुकते भी है इस मंदिर में देवी दो देविया है माता लक्ष्मी और शेरावाली जिनको कैला देवी के नाम से पुकारा जाता है यह मंदिर पहले बहुत छोटा सा था लेकिन अब बदलते परिवेश के साथ इस मंदिर की मान्यता दिन पर दिन बढती जा रही है करोली का निकास भी यही से होता है तभी इस मंदिर को निकास की भी कहा जाने लगा है यह नक्कास में है जिसकी स्थापना सन 1994 में कराई गई थी यहाँ पर रहने वाले निवासी नित्य नियम से माँ की पूजा करते है माँ की सेवा करते है नवरातो में यहाँ पर भक्तो की लम्बी कड़ी लगी रहती है मंदिर हरे भरे पर्यावरण के बीच में बना हुआ है

राजस्थान का करोली माता का मंदिर

भारत में माँ के बहुत अवतार है माँ ने समय समय दयालु भक्तो की रक्षा की है और दुष्टों का नाश किया है जिन लोगो से माँ खुश हो हटी है उनकी झोली खुशियों से भर देती है इस मनदिर की बहुत मान्यता है यहाँ के बारे में ऐसा कहा जाता है की माता को आज भी अपने एक भक्त का बहुत बेसब्री से इन्जार है करोली माता का मंदिर पहाड़ियों की तलहटी में बना हुआ है यह मनदिर पूरे - में प्रसिद्ध ही नहीं बल्कि देश के कोने कोने से लोग माता की की प्यारी सी झलक पाने के लिए आते है इस मंदिर यह वही देवी है जिनकी कंस हत्या करना चाहता था जिसका नाम यौगमाया था मंदिर बहुत चमत्कार है यहाँ के लोगो को माँ ने कई परेशनियो और राक्षसों से बचाया है तभी से यहाँ पर भक्त माँ के दर्शन किये बिना आगे नहीं बढते है इस मंदिर को राजा भूमपाल ने करवाया था यहाँ पर माता के बहुत अवतार है

झारखंड में रजरप्पा देवी चेत्रामास्तिका मंदिर

झारखंड में माँ की छवि को निहार कर हो जाते है भक्त ओत प्रोत माता का यह मंदिर पहाड़ो से घिरा हुआ नदियों के बीच में अपनी अलोकिक द्रष्टि से भक्तो का मेला लगा दिया है यहाँ पर माँ के दर्शन भुत देविक रूप में होते है माँ की मुख यहाँ पर आपको कटा हुआ उन्ही के हाथो में पकड़ा हुआ दिखाई देगा और गर्दन से जहाँ से शीश कटा हुआ है रक्त की धारा बहती रहती है विशाल देवी यहाँ की मनोकामना की देवी कही जाती है ऐसा कहा जाता है देवी अपने प्यारे भक्तो की आँखों में आंसू नहीं देख पाती है ग्रंथो के अनुसार जो एक शक्ति पीठ है यह झारखंड में चेत्रामास्तिका देवी का मंदिर है माँ दामोदर के भैरवी संगम पर सजी अपना दरबार लगा कर बैठी है यहाँ पर और भी छोटे छोटे सुन्दर मंदिर है दर्शन के लिए पूरे साल भरा रहता है यह मंदिर लेकिन नवरात्रों में यह मंदिर अलग ही चमकता है मंदिर के पास में बहुत ठंडक रहती भी रहती है नवरात्रों में यहाँ बहुत ख़ुशी भरा वातावरण रहता है इस मन्दिर में विवाह,मुंडन भी होते है

उत्तराखंड का सुरकंडा देवी का मंदिर

सुरकंडा देवी मंदिर में देवी ने प्राचीन समय से लेकर अब तक बहुत चमत्कार किये है इसलिए नौ देवी में सुरकंडा देवी एक अलग ही प्रतिमा की देवी है यहाँ पर देवी ने इस स्थान पर अपने पिता द्वारा किये गए यज्ञ में प्राणों को त्याग दिया था पौराणिक कथाओं के अनुसार शिव जी देवी को लेकर पूरे ब्रह्माण की परिक्रमा लगा रहे थे तभी विष्णु जी ने अपने हाथ में विराजमान चक्र से देवी के मृत शरीर को 51 भागो में बाँट दिया था जिसमे सती का शरीर यहाँ पर गिर गया था तभी इसको उत्तरखंड का प्रसिद्ध सुरकंडा मंदिर कहा जाता है यह मंदिर यूलिसाल गांव, धानाल्टी, टिहरी में बसा हुआ है मंदिर में माँ के दर्शन के लिए भक्तो को कद्दूखाल से 3 किलोमीटर पैदल यात्रा करनी होती है सुरकंडा देवी का मंदिर 2,757 की ऊँचे स्थान पर है देवी मंदिर बहुत ही हरे भरे विशाल पेड़ो से भरा हुआ है नवरात्रों में यहाँ पर विशाल मेला लगता है

जम्मू कश्मीर का देवी वैष्णो मंदिर

पूरे भारत में देवी वैष्णो की गुफा बहत सुन्दर और माता वैष्णो की गुफा है यह गुफा सुन्दर वादियों के बीच में बनी हुई है माता रानी यहाँ पर विशाल भव्य त्रिकूट की पहाड़ी पर बसी हुई है

विशाल पहाड़ी पर बैठ कर माँ पूरी श्रस्ती को चला रही है माता वैष्णो शक्ति की देवी है जो अपने भक्तो को वैष्णो बुला कर शक्ति देती है देवी यहाँ पर कटरा में विराजमान है यह स्थान बहुत प्रचलित स्थान है 5 हजार फीट की ऊंचाई पर बना हुआ यह माता वैष्णो का धाम प्रिय धर्मिक स्थल है जो उत्तर भारत के राज्य जम्मू और कश्मीर में है भक्तो को माँ के दर्शन 12 किलोमीटर की चढाई करके प्राप्त होते है यहाँ पर करोडो की तादात में भक्तो का जमगर लगा रहता है भक्त माँ के जय कारे लगाते लगाते माँ के पास पहुँच ही जाते है

टनकपुर का माता पूर्णा गिरी का दरबार

देवी पूर्णा गिरी माता का दरबार बहुत सच्चा दरबार है जहाँ पर भक्तो की हर मनोकामना होती है जो मांगो मनोकामना पूरी होती है यहाँ की विशेषता यह है की यहाँ पर भक्त अपनी मनोकामना के लिए माँ के दरबार में चुन्नी बांधते है और मनोकामना पूरी हो जाने पर माँ चुन्नी को खोलने जाते है नवरात्रों में यहाँ दर्शन की बहुत भीर होती है नवरात्रों में दर्शन के लिए यहाँ पर पुलिस का सख्त पहरा रहता है नवरात्रों में माता का भारी मेला लगता है जो पूरे नवरात्री और बाद में भी लगा रहता है हरे भरे पहाड़ो के बीच में पूर्णा गिरी माता का दरबार देवी ऊँची पहाड़ी पर विराजमान है देवी टनकपुर से 21 किमी दूर पर सोने की देवी है टनकपुर क्षेत्र उत्तराखंड के चंपावत जिले में पड़ता है। देवी पूर्णागिरी धाम 108 सिद्ध पीठों में से एक विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है

हिमाचल प्रदेश का ज्वाला देवी मंदिर

भक्तो अंनत काल से ही यह शक्ति पीठ बहुत ही प्राचीन अगनी की देवी है जो बहुत ही अद्भुत है इस स्थान की सबसे चमत्करी बात यह है की यहाँ पर देवी की एक ज्योति बहुत पुराने समय से जल रही है जिसको जलाने के लिए ना ही घी की जरुरत है ना ही किसी आने वाली हवा का डर सदियों से यह ज्योति ऐसे ही जल रही है यहाँ पर बहुत सारे जानकारी व्यक्ति भी आज तक इस बात का पता नहीं लगा पाए है की ज्योति केसे जल रही है माँ की ज्योति आज भी जल रही है जिसके दर्शन करने के लिए देश विदेश से लोग आ रहे है जो भी यह पर आकर सच्चे मन से जो भी मांगो अवश्य मिलता है देवी हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा 52 शक्ति पीठो में अलग ही विख्यात देवी है मंदिर कोई मूर्ति नहीं है बस अखण्ड ज्योति के दर्शन के लिए भक्त यहाँ पर भारी भीढ़ में लगकर ज्योति के दर्शन करते है यह पर 11 ज्वाला ज्योति है जो बिना बत्ती के जल रही है ज्वाला ज्योति का भोग लगाने पर भोग भी जलता नहीं है बस एक लोउ बनकर अखंड ज्योति जलती रहती है