करवा चौथ व्रत की कथा : यहाँ देखे और डाउनलोड करे ..

मेरी प्यारी सुहागिन स्त्रियों करवा चौंथ का ब्रत सुहागिन स्त्री की मान सम्मान का व्रत होता है क्यों की पति की आयु ही पत्नी का भविष्य और मान सम्मान निर्भर करता है इसीलिए सुहागिन स्तरीय यह ब्रत अपने पति परमेश्वर की लम्बी उम्र के लिए रखती है यह ब्रत बहुत ही सच्ची श्रधा के साथ रखा जाता है क्यों की यह साधारण ब्रत नहीं है इसमे पूरे दिन जल का त्याग रहता है

चतुर्थी कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाने वाला यह त्यौहार भारतीय त्योहारों मे विशेष महत्व रखता है जिसमें महिलाए पूरा दिन अपने पति के कल्याण के लिए व्रत रखती है जो जल्दी सूर्योदय के साथ शुरू होकर और देर शाम या कभी कभी देर रात को चंद्रोदय के उपरान्त समाप्त होता है सौभाग्य कि आकांशा से रखा जाने वाला यह महिलाओं का सबसे महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है और फिर उसके बाद उत्सव मनाती है इस दिन श्री गणेश कि पूजा विशेष रूप से की जाती है इस दिन महिलाएं स्नानादि करके करवा चौथ व्रत का आरंभ करती है और सजती सवरती है औरते विशेष वेशभूषा पहनती है

वो सोने चांदी के आभूषण पहनती है और उनकी सुंदरता मे चार चाँद लग जाते है व अच्छा भोजन करती है कि इस व्रत को रखने से परिवार मे खुशहाली आती है और पति की उम्र लंबी होती है, जीवन मे आ रही उनकी बाधाएं भी दूर होती है ये करक चतुर्थी के रूप में कहा जाता है ब्राह्मण या अन्य विवाहित महिला के लिए कुछ दान और दक्षिणा देने कि भी एक परम्परा है बालू अथवा सफेद मिटटी की वेदी पर शिव – पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, गणेश एवं चंद्रमा की मूर्तियों की स्थापना करें

यदि मूर्तियाँ न हो तो सुपारी पर धागा बांध कर उसकी पूजा की जाती है इसके पश्चात देवों का स्मरण करे और सुख सौभाग्य की कामना करते हुए करवे तथा बायने पर जल, चावल और गुड़ चढ़ायें अब तेरह बार रोली से टिका करें और रोली चावल छिडकें इसके पश्चात हाथ में तेरह दाने गेहूं लेकर करवा चौथ की व्रत कथा का श्रवण करे