कमल मंदिर (लोटस टेम्पल): दिल्ली में कमल मंदिर नहीं देखा तो क्या देखा ..

भारत की राजधानी दिल्ली में बना अद्भुत नज़ारा यहाँ पर कमल आकृति का कमल मंदिर है जिसको पर्यटक देखने के लिए यहाँ पर दूर दूर से आते है

दोस्तों जब में अपने 12 वी कक्षा की परीक्षा देने के बाद छुट्टियों में अपने कालेज के दोस्तों के साथ इस लोटस टेम्पल को देखने के लिए गयी तो दिन कब निकल गया पता ही नहीं चला ऐसा लगा की उस दिन बहुत छोटा दिन था क्योकि वहा के उस मंदिर के आकर्षण ने सभी साथियों को सूर्य कब अस्त हो गया पता ही नहीं चला मन कर रहा था इस मंदिर को जितना देखो घूमो निहारो कम है

साथियों दिल्ली को एक भारत का प्राचीनता से भरी इन्द्रप्रस्थ की राजधानी वाला शहर माना जाता है पहले यहाँ पर 19 वि शताब्दी में इन्द्रप्रस्थ नाम का गाँव हुआ करता था जब इस स्थान पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की देख रेख में कराई गई खुदाई में कुछ भित्तिचित्र मिले हैं जो ईसा से एक हज़ार वर्ष पूर्व का लगया जा रहा है जिस इतिहास को महाभारत के समय से जोड़ा जाता है

यहाँ चंदरबरदाई की रचना पृथवीराज रासो में तोमर वंश राजा अनंगपाल को दिल्ली का संस्थापक माना जाता है उसने ही दिल्ली में लाल कोट का निर्माण भी करवाया था

कमल मंदिर कहाँ पर है

कमल मंदिर दिल्ली के सुन्दर नेहरू प्लेस कालकाजी मंदिर के निकट बना है इस मन्दिरं में भगवान की मूर्तियों को नहीं रखा गया है ना ही मंदिर में कोई धार्मिक कार्य होते है बल्कि यहाँ पर सभी धर्मो से जुडे हुए पवित्र लेख पढे जाते है, कमल का फूल तो वैसे भी सभी लोग शांति और पवित्रता का प्रतीक मनाते है और उसकी पखुडिया तो आँखों को ठंडक देती है यह फूल कीचड़ में खिलने के बाद भी पवित्र और साफ़ खिलता है यहाँ पर एस मंदिर को देखने के लिए हर वर्ष देश विदेश से 11000 पर्यटक यहाँ आते है इस सोंदर्य को देखने के लिए जो शांत ध्यान का प्रसिद्ध केंद्र है इस मंदिर को 24 दिसंबर 1986 को पर्यटकों के लिये बनाया गया लेकिन घूमना फिरना यहाँ पर 1 जनवरी 1987 को खोला गया था

मंदिर में पर्यटकों को आर्किषत करने के लिए ऐसा क्या है

दोस्तों यहाँ पर तो मानो आकर्षणता का खजाना है प्रार्थना करने के लिए ऊंचे गुंबद वाला प्रार्थनागार है जहाँ पर लोग मन को शांत रखने के लिए पाठ होते रहते है हरी घास के घास के मैदान है जो सफेद विशाल भवन है समय समय पर लोग यहाँ पर होने वाली प्रार्थनाओ के साथ सांस्कृतिक भागो में भाग लेते है यह मंदिर ‘अनेकता में एकता’ के सिद्धांत को यथार्थ रूप देता हैं। यहाँ पर इस मंदिर में 9 द्वार और मंदिर के 9 कोने है यह विस्तार, एकता एवं अखंडता को दर्शाता है। उपासना मंदिर चारों ओर से नौ बड़े जलाशयों से घिरा हुआ है

जो इस मंदिर को सुन्दर तो बनाता है बल्कि इस स्थान को ठंडा भी बनाता है यह इलाका लोगो को ताजगी देने के साथ साथ कमल के फूल की तरह बनी इमारत है जब आप यहाँ पर सुबह और शाम के समय इस इमारत को देखेगे तो आप इस सफ़ेद संगमरमरी इमारत में ही खो जायेगे

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